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पति की गुलाम नहीं पत्नी…

Wife is not husbands property can not be forced to live with him Supreme Court

सुर्पिम कोर्ट का बड़ा फरमान…

कई लोग महिलाओं को अपनी संपति समझते हैं| जब बेटी मां-बाप के घर होती है तो उस पर उनका राज चलता है| जब शादी हो जाती है तो पति की बात माननी पड़ती है| इस मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है| कोर्ट ने कहा कि पत्नी अपने पति की गुलाम या विरासत नहीं होती है जिसे पति के साथ जबरन रहने को कहा जाए|

एक पति ने कोर्ट से गुहार लगाकर अपनी पत्नी को साथ रहने के आदेश देने की मांग की थी| इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन और हेमंत गुप्ता ने कहा कि आपको क्या लगता है? क्या एक महिला गुलाम या संपत्ति है जो हम ऐसे आदेश दें? क्या महिला कोई संपत्ति है जिसे हम आपके साथ जाने को कहें?

साल 2015 में महिला ने गोरखपुर कोर्ट में याचिका दायर कर पति से गुजारा-भत्ता की मांग की थी| कोर्ट ने पति को 20 हजार रुपये हर महीने पत्नी को देने का आदेश दिया था| इसके बाद पति ने कोर्ट में दांपतिक अधिकारों की बहाली के लिए अपनी याचिका दायर की थी|

पति ने हाई कोर्ट का रुख किया और याचिका दायर कर गुजारा-भत्ता दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वह अपनी पत्नी के साथ रहने को तैयार है तो इसकी जरूरत क्यों है| इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी जिसके बाद शख्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया|